रविवार, 27 सितंबर 2009

साहब को बाथरूम में तो जीने दो



यू.पी  के अफसरों  अब बाथरूम में भी चैन नही मिलने वाला. अरे भाई यही तो एक जगह थी जहाँ हज़रात आराम से आराम फरमाते थे. इस जगह पर फाईलें तो फाइले फ़ोन तक से छुटकारा था. घंटी बजती रहती थी लेकिन साहब बाथरूम से निकलने का नाम नहीं लेते थे. लेकिन अब साहब ऐसा नहीं कर पाएंगे. फ़ोन नहीं उठाना तो दूर साहब ने मोबाइल भी स्विच किया तो गये काम से. दरअसल, सूबे की मायावती सरकार ने साफ-साफ कह दिया है कि अफसरों की यह नाफरमानी नाकाबिले बरदाश्त है।

बकायदा आदेश जारी कर दिया गया है कि सचिवालय में तैनात सभी अधिकारी-कर्मचारी मोबाइल फोन हमेशा खुले रखें ताकि आकस्मिक आवश्यकता के समय तत्काल सम्पर्क हो सके। बात यहीं खत्म नहीं हुई, आदेश में बहुत साफ शब्दों में लिख दिया गया है- ''आवश्यकता पड़ने पर यदि सम्बंधित अधिकारियों से सम्पर्क नहीं हो पाता है तो उसके विरुद्ध अधिकारी-कर्मचारी सेवा नियमावली 1956 के अन्तर्गत कार्यवाही की जा सकती है।''

अधिकारियों-कर्मचारियों की इस नाफरमानी पर सरकार को गुस्सा आना स्वाभाविक भी है। आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय सम्पर्क करने के नजरिए से सरकार ने सचिवालय में तैनात सभी कर्मचारियों और विशेष सचिव स्तर तक के अधिकारियों को अपने स्तर से मोबाइल फोन उपलब्ध करा रखे हैं। बकायदा उनके बिल का भुगतान सरकार करती है। लेकिन जिस नजरिए से यह सुविधा उपलब्ध कराई गई, वह पूरी होती नहीं दिखती। आदेश में कहा गया है, ''कतिपय मोबाइल बंद मिलते हैं या फिर उनके उत्तर प्राप्त नहीं होते। ऐसी स्थिति में आकस्मिक आवश्यकता पड़ने पर एक तरफ जहां सम्बंधित अधिकारियों से सम्पर्क नहीं हो पाता, वहीं शासकीय काम में भी बाधा पड़ती है।''


ऐसी स्थिति भविष्य में न पैदा हो, इसी के दृष्टिगत सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। देखने वाली बात होगी सचिवालय में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों पर इस आदेश का कितना असर पड़ता है।



1 टिप्पणी:

  1. वाह क्या खूब लिखा. शौचालय या विचारालय पोस्ट हमारे ब्लॉग (lifemazedar.blogspot.com) पर ज़रूर पढ़ें.... आपका ही चन्दर मेहेर

    जवाब देंहटाएं