रविवार, 27 सितंबर 2009

नीतिश बाबू इतने से काम नहीं चलेगा


बिहार में बेहतर काम कर रहे नीतीश कुमार ने बीते शुक्रवार को एक और अच्छा काम किया. नीतीश बाबू की पहल के चलते तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित श्रीराम गोकुल  टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड में बंधक बना कर रखे गये २२ बिहारी मजदूरों को वहां के जिला प्रशासन ने छुड़ा लिया. प्रशासन ने कम्पनी के आठ गुंडों को गिरफ्तार भी किया है. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन श्रमिकों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने पर इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रभारी प्रधान सचिव आमिर सभानी को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सुभानी ने तमिलनाडु के गृह सचिव, श्रम विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कोयंबटूर के जिलाधिकारी से संपर्क स्थापित किया। सुभानी ने बताया कि तमिलनाडु के गृह सचिव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोयंबटूर के कारखाना निरीक्षक को कपड़ा मिल में भेजा और जिला प्रशासन के सहयोग से सभी 22 मजदूरों को मुक्त कराकर शुक्रवार सबेरे जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में बिठा कर उन्हें उनके घर भेज दिया। रोहतास जिले के जिलाधिकारी अनुपम कुमार के मुताबिक कोयंबटूर में रिहा कराए गये सभी श्रमिक करगहर थाना क्षेत्र के लखनपुरा, बसंतपुर और सिरसियां गांव के रहने वाले हैं। इन श्रमिकों के परिवार के लोगों का कहना है कि कपड़ा मिल में काम के दौरान एक मजदूर मनीष कुमार का हाथ कट गया। इसके लिए मुआवजे की इन मजदूरों द्वारा मांग की जा रही थी। इसपर मिल प्रबंधन ने इन्हें मारपीट कर बंधक बना लिया था। उन्होंने बताया कि बंधक बनाए गए इन मजदूरों में शामिल पिंटु कुमार ने किसी तरह मोबाइल फोन से इस घटना की सूचना अपने परिजनों को दी जिसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन से संपर्क साधा। इसके बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई। जिलाधिकारी रोहतास ने बताया इन मजदूरों को बंधक बनाने वाली कंपनी के आठ गुर्गो को दो हथियार के साथ गिरफ्तार होने की जानकारी कोयंबटूर प्रशासन द्वारा दी गई है। उन्होंने बताया कि मुक्त हुए मजदूरों को कोयंबटूर जिला प्रशासन ने एक-एक हजार रुपये देकर ट्रेन पर सवार कर बिहार के लिए रवाना कर दिया है.
 भाई बड़ी ख़ुशी की बात है!  हमारे नीतीश बाबू इतने संवेदनशील हैं कि उन्होंने गरीब मजदूरों के बारे में इतना सोचा. लेकिन भैया बस इतने से बात बनाने वाली नहीं है. असली सवाल तो ये है की तमिलनाडु से लौटने के बाद बिहार में ये मजदूर करेंगे क्या? दरअसल इसी एक सवाल ने बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों नौजवानों को तमिलनाडु से लेकर कश्मीर तक और मुंबई से लेकर असम तक  पिटने पर मजबूर कर दिया है.  जब तक इन दोनों प्रदेशों के नेता अपने यहाँ रोजगार और तरक्की के बेहतर रास्ते नहीं तलाशते, कोयंबटूर जैसे हादसे तो होते ही रहेंगे.



























































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